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Bhagavad Gita
The Song of God

Bhagavad Gita: Chapter 10, Verse 35

बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् |
मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकर: || 35||

बृहत्-साम–बृहत्साम; तथा भी; साम्नाम्-सामवेद के स्तोत्र में; गायत्रीगायत्री मंत्र; छन्दसाम्-समस्त छन्दों में; अहम्-मैं हूँ; मासानाम्-बारह महीनों में; मार्ग-शीर्ष:-मार्गशीर्ष मास; अहम्–मैं; ऋतूनाम्-सभी ऋतुओं में; कुसुम-आकर:-वसन्त।

Translation

BG 10.35: सामवेद के स्तोत्रों में मुझे बृहत्साम और छन्दों में मुझे गायत्री समझो। मैं बारह मासों में मार्ग शीर्ष और ऋतुओं में पुष्प खिलाने वाली वसन्त ऋतु हूँ।

Commentary

इससे पहले श्रीकष्ण ने कहा था कि वेदों में वे सामवेद हैं जो सुन्दर भक्तिमय गीतों से परिपूर्ण है। अब वे कहते हैं कि सामवेद में वे बृहत्साम हूँ जिसका स्वर अत्यंत मधुर है और ये विशेष रूप से मध्यरात्रि में गाए जाते हैं। अन्य भाषाओं के समान संस्कृत भाषा में काव्य रचना के लिए विशिष्ट पद्यों और छंदो की व्यवस्थाएँ हैं। वेदों में कई छंद हैं। इनमें गायत्री अति आकर्षक और मधुर है। जिस छंद में प्रसिद्ध गायत्री मंत्र सम्मिलित है वह गायत्री छंद ही है। यह गहन सार्थक प्रार्थना भी है।

ओउम् भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं 

भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

(ऋग्वेद-3.62.10)

 "हम तीनों लोकों को प्रकाशित करने वाले और हमारे लिए पूजनीय भगवान का ध्यान करते हैं। वह सभी पापों का और अज्ञानता का विनाश करता है। वह हमारी बुद्धि को उचित दिशा की ओर प्रेरित करे।" गायत्री मंत्र युवा पुरुषों के लिए पवित्र उपनयन संस्कार का भी अंग है और दैनिक धार्मिक अनुष्ठानों में गाया जाता है। इसके अतिरिक्त देवी गायत्री, रुद्र गायत्री, ब्रह्म गायत्री, परमहंस गायत्री और कुछ अन्य गायत्री मंत्र भी वेदों में मिलते हैं। मार्गशीर्ष हिन्दू पंचाङ्ग (कैलेंडर) का ग्यारहवाँ मास है। यह नवम्बर और दिसम्बर माह में पड़ता है।

भारत में तापमान की दृष्टि से यह मास उत्तम माना जाता है क्योंकि यह न तो अधिक गर्म न ही अधिक ठंडा होता है। वर्ष में इस समय में खेतों से फसल काटी जाती है। इन कारणों से इस मास को प्रायः सभी पसंद करते हैं। वसंत ऋतु को ऋतु राज या ऋतुओं के राजा के रूप में जाना जाता है। इस समय प्रकृति जीवन में उल्लास की बौछारें छिटका कर सबको प्रफुल्लित करती है। कई उत्सव भी इस ऋतु में मनाये जाते हैं। वसंत ऋतु वातावरण में व्याप्त होने वाले हर्षोल्लास का प्रतीक है। इस प्रकार ऋतुओं में वसंत भगवान के वैभव को प्रकट करती है।

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